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ग्रह – दोष निवारण

January 7, 2012TWSBlog0

मंत्र जप, व्रत एवं ग्रह सम्बन्धी वस्तुओं के दान से ग्रह जनित दोषों का निवारण |

ग्रह – दोष निवारण

ग्रहों की शुभता और अशुभता जन्म कुंडली में भावगत स्थित ग्रहों के अनुसार होती है| जन्म कुंडली में भावगत ग्रह शुभ स्थिति में हैं, तो व्यक्ति को परिणाम भी अच्छे मिलते हैं| यदि अशुभ स्थिति में हैं, तो बनते हुए काम भी बिगड़ जायेंगे| प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए ग्रह सम्बन्धी मंत्र का जप या व्रत करें| यह उपाय इतने सरल और सुगम हैं, जिन्हें कोई भी साधारण व्यक्ति आसानी से कर सकता है|

        सूर्य के लिए – सूर्य की प्रतिकूलता दूर करने के लिए रविवार का व्रत रखें| भोजन नमक रहित करें| सूर्य सम्बन्धी वस्तुओं- गुड, गेहूं, या ताम्बे का दान किसी औसत उम्र वाले व्यक्ति को दें| दान रविवार को सांयकाल करें| यदि चाहें तो गाय या बछड़े को गुड-गेहूं खिलाएं| अपने पिताजी की सेवा करें| यह नहीं कर सकें तो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करके आदित्य ह्रदयस्त्रोत का पाठ करें|
        चंद्रमा के लिए – यदि कुंडली में चंद्रमा, प्रतिकूल चल रहा हो तो सोमवार का उपवास शुरू कर दें| अपनी माँ की सेवा करें| सोमवार को शाम किसी युवती को शंख, सफ़ेद वस्त्र, दूध, चावल व चांदी का निरंतर दान करते रहें| गाय को सोमवार को सना हुआ आता खिलाएं| चंद्रमा यदि दोषप्रद हो तो व्यक्ति दूध का प्रयोग नहीं करें|
        मंगल के लिए – मंगल की प्रतिकूलता से बचाव के लिए मंगलवार का व्रत रखें| अपने छोटे भाई-बहन का विशेष ख्याल रखें| मंगल की वस्तुओं – लाल कपडा, गुड, मसूर की दाल, स्वर्ण, ताम्बा, तंदूर पर बनी मीठी रोटी का यथा-शक्ति दान करते रहें| आवेश पर हमेशा नियंत्रण रखने का प्रयास करें| हिंसात्मक कार्य से दूर रहें|
        बुध के लिए – बुध दोष निवारणार्थ बुधवार का उपवास करें| इस दिन उबले हुए मूंग गरीब व्यक्ति को खिलाएं| गणेशजी की अभ्यर्थना दूर्वा से करें| हरे वस्त्र, मूंग की दाल का दान बुधवार मध्याह्न करें| बुध के दोष दूर करने के लिए अपने वजन के बराबर हरी घांस गायों को खिलाएं| बहिन व बेटियों का हमेशा सम्मान करें|
        गुरु के लिए – देवगुरु बृहस्पति यदि दशावाश या गोचरवश प्रतिकूल परिणाम दे रहे हों तो गुरूवार का उपवास करें| इसके अलावा केले की पूजा, पीपल में नित्य जल चढ़ाना, गुरुजनों व विद्वान व्यक्तियों का सम्मान करने से भी गुरु की प्रतिकूलता दूर होती है|

      शुक्र के लिए – शुक्र की प्रतिकूलता दूर करने के लिए शुक्रवार का व्रत किसी शुक्लपक्ष से प्रारम्भ करें| फैशन सम्बन्धी वस्तुओं इत्र, फुलेल, डियोडरेंट इत्यादि का प्रयोग ना करें| रेशमी वस्त्र, इत्र, चीनी, कर्पूर, चन्दन, सुगन्धित तेल इत्यादि का दान किसी ब्राह्मन युवती को दें|

        शनि / राहू- केतु के लिए – शनि राहू – केतु मुख्यतया जप-तप की बजाय दान दक्षिणा से ज्यादा प्रसन्न होते हैं| इनके द्वारा प्रदत्त दोष निवारणार्थ शनिवार का व्रत रखें| सुबह पीपल को जल से सींचे व सांयकाल गृत का दीपक जलाएं| काले वस्त्र व काली उड़द, लौह, तिल, सरसों का तेल, गाय आदि का दान करें|

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Pt. Nand Kishor Sharma
Astro & Vastu Specialist.
Born in 1958 at Bissau district, Jhunjhunu and now working as an officer in Reserve Bank of India.Providing consultancy on Astro and Vaastu since 1978 and writing on the subject since 2001 and written more than 300 articles in various News papers and magzines. National and international forecast time to time specially on sports, earthquake etc.

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